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सल्तनत काल

1206 ई० से 1526 ई० तक दिल्ली पर पांच वंशों ने राज्य किया, जो निम्न है:-

1.गुलाम (मामलूक) वंश

2.खिलजी वंश

3.तुगलक वंश

4.सैय्यद वंश

5.लोदी वंश 

 गुलाम वंश (Slave Dynasty) – 1206 ई० से 1280 ई०

दिल्ली की सल्तनत पर काबिज होने वाला पहला वंश गुलाम वंश था, गुलाम वंश की स्थापना मुहम्मद गोरी के एक गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने की, हबीबुल्ला द्वारा भारत में आये तुर्कों को मामलूक (गुलाम) की संज्ञा दी गई है

कुतुबुद्दीन ऐबक(1206-10 ई०)

  • कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्याभिषेक लाहौर में हुआ, बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया तथा दिल्ली सल्तनत की स्थापना की
  • कुतुबुद्दीन की दानशीलता से प्रभावित होकर मिन्हाज ने उसे लाख बख्श के नाम से पुकारा
  • कुतुबमीनार का निर्माण कार्य प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा 1199 ई० में शुरू कराया गया था
  • अजमेर में “अढ़ाई दिन का झोंपड़ा” नामक मस्जिद का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा कराया गया था
  • कुव्वत-उल-इस्लाम’ मस्जिद (दिल्ली) का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा कराया गया था
  • कुतुबुद्दीन ऐबक के एक सेनानायक बख्तियार खिलजी ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का विध्वंश किया था
  • ऐबक की मृत्यु चौगान (पोलो) खेलते समय घोड़े से गिर कर हो गयी, उसको लाहौर में दफन किया गया 
  • मुहम्मद गोरी ने कुतुबुद्दीन ऐबक को मलिक की उपाधि से विभूषित किया
  • हसन निजामी एवं फखेमुद्दबिर जैसे विद्वान कुतुबुद्दीन के दरबार के रत्न थे

इल्तुतमिश(1211-36 ई०)

  • आरामशाह की हत्या कर इल्तुतमिश (ऐबक का गुलाम एवं दामाद) गद्दी पर बैठा
  • दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश को ही माना जाता है
  • सर्वप्रथम इल्तुतमिश ने शुद्ध अरबी सिक्केटंका (चाँदी) एवं जीतल (ताँबा) जारी किये
  • इल्तुतमिश ने भारत में इक्ता प्रणाली की शुरुआत की
  • इल्तुतमिश ने तुर्कान-ए-चिहालगानी के नाम से 40 गुलाम सरदारों का एक संगठन बनाया 
  • बगदाद के खलीफा ने इल्तुतमिश के पद को वैधानिक मान्यता दी तथा उसे खलीफा के सहायक-नासिर अमीर उल मोमिनीन की उपाधि से विभूषित किया

रजिया सुल्तान(1236-40 ई०)

  • रजिया दिल्ली की सुल्तान बनने वाली पहली महिला थी
  • रजिया ने पर्दा त्यागकर पुरुषों के समान काबा (चोगा) एवं कुलाह (टोपी) पहनकर दरबार की कार्रवाइयों में हिस्सा लिया
  • जमालुद्दीन याकूत को रजिया ने अमीर-ए-आखूर एवं मलिक हसन गोरी को सेनापति के पद पर प्रतिष्ठित किया  
  • रजिया ने अल्तूनिया से विवाह किया
  • कैथल के निकट डाकूओं ने उसकी हत्या कर दी

बलबन(1265 से 1287 ई०)

  • रजिया के बाद उसका भाई मुजुद्दीन बहरामशाह(1240-1242) तक गद्दी पर बैठा
  • बहरामशाह के शासन काल में बलबन अमीर-ए-आखुर (अश्वशाला का प्रधान) बना
  • बहरामशाह के बाद अलाउद्दीन मसूदशाह(1242-1246) गद्दी पर बैठा
  • मसूदशाह के काल में ही बलबन ने अपनी शक्ति बढाना शुरु किया
  • बलबन ने मसूदशाह को कैद करके कारागार में डाल दिया जहाँ उसकी मृत्यु हो गयी
  • मसूदशाह की मृत्यु के बाद नासिरुद्दीन महमूद(1246-1265) गद्दी पर बैठा
  • नासिरुद्दीन एक शांतिप्रिय शासक था, वह खाली समय में कुरान की आयातों की नकल करता था
  • नासिरुद्दीन ने अपने शासन की बागडोर बलबन को सौंप दी और उसे ‘उलूग खाँ’ की उपाधि प्रदान की
  • बलबन ने अपनी पुत्री की शादी नासिरुद्दीन महमूद से की
  • मिन्हाज-उस-सिराज ने अपनी रचना तबकात-ए-नासिरी इसी नासिरुद्दीन को समर्पित की है
  • नासिरुद्दीन के समय में ही बलबन ने 1256 ई0 में मंगोल नेता हलाकू खाँ से समझौता करके पंजाब में शांति कायम की
  • इब्नबतूता की रचना रहेला के अनुसार बलबन ने नासिरुद्दीन महमूद की हत्या की और स्वयं गद्दी पर बैठा
  • बलबन स्वयं को फिरदौसी के शाहनामा में वर्णित अफरासियाब वंश से सम्बंधित बताता था
  • 1265 ई0 में बलबन सुल्तान ग्यासुद्दीन के नाम से गद्दी पर बैठा
  • बलबन का शासन काल 1265 से 1287 तक रहा
  • बलबन ने गद्दी पर बैठते ही सर्वप्रथम सुल्तान के पद की गरिमा कायम की और दिल्ली सल्तनत की सुरक्षा के प्रबंध किये
  • इल्तुतमिश ने जो चालीसा दल बनाया था उसे बलबन ने नष्ट कर दिया 
  • बलबन दिल्ली सल्तनत का एक पहला ऐसा व्यक्ति था ,जो सुल्तान न होते हुए भी सुल्तान के छत्र का प्रयोग करता था और यह पहला शासक था जिसने सुल्तान के पद और अधिकारों के बारे में विस्तृत रुप से विचार प्रस्तुत किये
  • बलबन कुरान के नियमों को शासन व्यवस्था का आधार मानता था, उसके अनुसार सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि होता है
  • बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा को स्थापित करने के लिए “रक्त और लौह नीति” अपनाई
  • बलबन ने कहा कि सुल्तान का पद ईश्वर के समान होता है तथा सुल्तान का निरंकुश होना जरुरी है उसके अनुसार राजा को शक्ति ईश्वर से प्राप्त होती है इसलिए उसके कार्यो की सार्वजनिक जाँच नही की जा सकती
  • बलबन ने अपनी शक्ति प्रदर्शित करने के बाद ‘जिल्ले इलाही(ईश्वर का प्रतिबिम्ब) की उपाधि धारण की
  • बलबन दरबार में सम्पूर्ण वेश-भूषा के साथ उपस्थित होता था, उसने दरबारी शिष्टाचारों को कठोरता से लागू किया उसके दरबार में न तो कोई हँसता था न मुस्कुराता था तथा उसके समय में दरबारियों का शराब पीना भी निषेध था
  • बलबन ने ईरानी परम्पराओं के अनुसार कई परंपराएं आरंभ करवाई उसने ‘सिजदा’ (भूमि पर लेट कर अभिवादन करना) और ‘पैबोस’ (सुल्तान के चरणों को चूमना) जैसी व्यवस्था भी लागू की 
  • बलबन के दरबार में प्रत्येक वर्ष ईरानी त्योहार ‘नौरोज’ काफी धूमधाम से मनाया जाता था, इसकी शुरुआत बलबन के समय से ही हुई
  • बलबन ने दीवान-ए-आरज (केन्द्रीय सैन्य विभाग) एवं दीवान-ए-बरीद (केंद्रीय गुप्तचर विभाग) का गठन किया
  • बलबन के दरबार में अमीर खुसरो एवं अमीर हसन जैसे कवि रहते थे
  • बलबन ने अपने चचेरे भाई शेर खाँ को जहर दे कर मरवा डाला
  • 1285 ई0 में मंगोलों ने तैमूर खान के नेतृत्व में मुल्तान पर आक्रमण किया, जिसमें बलबन का पुत्र मुहम्मद मंगोलों से लडता हुआ मारा गया, अपने पुत्र की मृत्यु का बलबन को बहुत गहरा आघात पहुंचा तथा शीघ्र ही एक वर्ष के अंदर ही बलबन की भी मृत्यु 1286 ई0 में हो गयी
  • शमशुद्दीन कैमूर्स गुलाम वंश का अंतिम शासक था
शासक शासन-काल
कुतुबुद्दीन ऐबक (1206–1210)
आरामशाह  (1210–1211)
इल्तुतमिश  (1211–1236)
रुकुनुद्दिन फिरोजशाह (1236)
रज़िया सुल्ताना (1236–1240)
बहरामशाह (1240–1242)
अलाउद्दीन मसूदशाह (1242–1246)
नासिरुद्दिन महमूद (1246–1266)
ग्यासुद्दिन बलबन (1266–1286)
कैकूबाद (1287–1290)
शमशुद्दीन कैमूर्स 1290

 खिलजी वंश (1290 ई० -1320 ई०)

 

जलालुद्दीन खिलजी(1290-96 ई०)

  • जलालुद्दीन खिलजी ने गुलाम वंश को समाप्त कर खिलजी वंश की स्थापना की 
  • जलालुद्दीन खिलजी ने किलोखरी में अपनी राजधानी स्थापित की

अलाउद्दीन खिलजी(1296-1316ई०)

  • जलालुद्दीन खिलजी के भतीजे अलाउद्दीन खिलजी ने उसकी हत्या कर दी एवं स्वयं दिल्ली का सुल्तान बन बैठा
  • अलाउद्दीन को बचपन में अली गुरशस्प के नाम से पुकारा जाता था 
  • अलाउद्दीन खिलजी पहला ऐसा सुल्तान था जिसने खलीफा की श्रेष्ठता को चुनौती देते हुए सिक्कों पर उसका नाम खुदवाना बंद कर दिया 
  • जलालुद्दीन खिलजी ने अलाउद्दीन को अमीर-ए-तुनुक उपाधि से विभूषित किया था 
  • अलाउद्दीन खिलजी पहला सुल्तान था जिसने स्थायी सेना का गठन किया एवं सेना को नकद वेतन देने की प्रथा आरंभ की 
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सैनिकों का हुलिया लिखने एवं घोड़ों को दागने की प्रथा आरंभ की
  • अलाउद्दीन ने आर्थिक क्षेत्र में बाजार नियंत्रण व्यवस्था लागू की एवं भू-राजस्व की दर को बढ़ाकर कुल उपज का ½ हिस्सा कर दिया 
  • खम्स (लूट का धन) में सुल्तान का हिस्सा 3/4 करने वाला शासक अलाउद्दीन था 
  • दक्षिण भारत में अलाउद्दीन के सैन्य-अभियानों का नेतृत्व मलिक काफूर ने किया 
  • अमीर खुसरो जिन्होंने सितार एवं तबला जैसे वाद्ययंत्रों का आविष्कार किया, अलाउद्दीन के दरबारी कवि थे
  • अलाउद्दीन ने अमीर खुसरो को तूती-ए-हिन्द की उपाधि से विभूषित किया 
  • मिल्क(सम्पत्ति), इनाम एवं वक्फ के अंतर्गत दी गई भूमियों को राजस्व सुधारों के तहत वापस लेकर अलाउद्दीन ने इन्हे खालसा (राजकीय भूमि) में तब्दील कर दिया 
  • अलाउद्दीन खिलजी ने अपने शासनकाल में दो नवीन कर चराई (दुधारू पशुओं पर) एवं गढ़ी (घरों एवं झोपड़ी पर) लगाया 

कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी(1316-1320 ई०)

  • अलाउद्दीन की मृत्यु के पश्चात कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी गद्दी पर बैठा जो एक भ्रष्ट शासक था
  • मुबारक खिलजी की हत्या उसके वजीर खुशरो खाँ ने कर दी

 

शासक शासन-काल
जलालुद्दीन खिलजी 1290–1296
अलाउद्दीन खिलजी 1296–1316
कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316–1320
खुशरो खाँ 1320

तुगलक वंश((1320 ई० -1398 ई०) 

गयासुद्दीन तुगलक(1320-25 ई०)

  • खुशरो खाँ को पराजित कर गाजी मलिक या गयासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली सल्तनत पर तुगलक वंश के शासन की स्थापना की, उसने 29 बार मंगोलों के आक्रमण को विफल किया 
  • गयासुद्दीन तुगलक ने अपने साम्राज्य में सिंचाई की व्यवस्था की, संभवत: नहरों का निर्माण करने वाला वह प्रथम शासक था 
  • गयासुद्दीन तुगलक ने रोमन शैली में एक नवीन नगर तुगलकाबाद बसाया इस शहर में छप्पनकोट नामक दुर्ग भी बनवाया, यह नगर दिल्ली के नजदीक स्थित है 

मुहम्मद-बिन-तुगलक(1325-51 ई)

  • गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु के पश्चात जौना खाँ दिल्ली के सिंहासन पर बैठा एवं इतिहास में मुहम्मद-बिन-तुगलक के नाम से प्रसिद्ध हुआ 
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक मध्यकाल का सबसे शिक्षित, विद्वान एवं योग्य शासक था, परंतु वह अपनी सनक भरी योजनाओं के कारण इतिहास में उचित स्थान नहीं बना सका
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक ने दीवान-ए-अमीर-कोही (कृषि विभाग) की स्थापना की 
  • मोरक्को निवासी इब्नबतूता को 1333 ई० में मुहम्मद-बिन-तुगलक ने दिल्ली का काजी नियुक्त किया 
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक ने इब्नबतूता को 1342 ई० में राजदूत बनाकर चीन भेजा
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक ने इंशा-ए-महरु नामक पुस्तक की रचना की
  • 1341 ई० में चीनी सम्राट तोगनतिमुख ने अपना एक राजदूत भेजकर मुहम्मद-बिन-तुगलक से हिमाचल प्रदेश के बौद्ध मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए अनुमति मांगी 
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक के शासन काल में हरिहर एवं बुक्का नामक दो भाईयों ने 1336 ई० में स्वतंत्र राज्य विजयनगर की स्थापना की
  • महाराष्ट्र में 1347 ई० में अलाउद्दीन बहमनशाह ने स्वतंत्र बहमनी साम्राज्य की स्थापना कर ली
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक के शासनकाल में ही कान्हा नायक ने वारंगल को स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक के शासन काल में कई विद्रोह हुए-कड़ा-निजाम का विद्रोह, बिदर-साहेब सुल्तान का विद्रोह तथा गुलबर्गा में अली शाह का विद्रोह
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक दिल्ली सल्तनत का पहला ऐसा सुल्तान था जो अजमेर में शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गया 
  • मुहम्मद-बिन-तुगलक की मृत्यु थट्टा में हुई, उसकी मृत्यु पर इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी लिखते है-“अंततः जनता को उससे मुक्ति मिली एवं उसे जनता से”

फिरोज शाह तुगलक(1351-88 ई०)

  • फिरोज शाह तुगलक सुल्तान मुहम्मद-बिन-तुगलक का चचेरा भाई था मुहम्मद-बिन-तुगलक की मृत्यु के पश्चात अगले सुल्तान के रूप में थट्टा में उसका राज्याभिषेक हुआ 
  • फिरोज शाह तुगलक का राज्याभिषेक एक बार फिर से अगस्त 1351 ई० में दिल्ली में हुआ |
  • फुतुहात-ए-फिरोजशाही के अनुसार फिरोज शाह तुगलक ने राजस्व व्यवस्था में परिवर्तन करते हुए 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल 4 करों-खराज (लगान), जजिया (गैर-मुस्लिमों से वसूला जाने वाला कर), खम्स (युद्ध में लूट का माल), जकात (मुसलमानों से लिया जाने वाला कर) आदि को ही प्रचलन में मुख्य रूप से रखा 
  • ब्राह्मणों पर जजिया कर लगाने वाला पहला मुसलमान शासक फिरोज शाह तुगलक था
  • फिरोज शाह तुगलक ने कृषि को उन्नत बनाने के लिए सिंचाई विभाग की स्थापना की तथा सिंचित भूमि पर कुल ऊपज का 1/10 भाग हक-ए-शर्ब (सिंचाई कर) अध्यारोपित किया
  • फिरोज शाह तुगलक ने 5 बड़ी नहरों का निर्माण करवाया, जिसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण उलूग खानी नहर थी जिसके द्वारा यमुना का पानी हिसार तक पहुँचता था 
  • फिरोज शाह तुगलक ने हिसार, फिरोजाबाद, फतेहाबाद, जौनपुर एवं फिरोजपुर सहित 300 नये नगरों की स्थापना की 
  • फिरोज शाह तुगलक ने अशोक के खिज्राबाद (टोपरा) एवं मेरठ में स्थित दो स्तंभों को वहाँ से स्थानांतरित कर दिल्ली में स्थापित किया 
  • फिरोज शाह तुगलक ने अनाथ मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं एवं लड़कियों के लिए दीवान-ए-खैरात (दान विभाग) की स्थापना की
  • फिरोज शाह तुगलक के शासनकाल में सल्तनतकालीन सुल्तानों में दासों की संख्या सर्वाधिक (लगभग 1,80,000) थी, उसने उनके लिए दीवान-ए-बंदगान (दास विभाग) की स्थापना की
  • फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली के निकट दार-उल-सफा नामक एक खैराती अस्पताल खोला
  • फिरोज शाह तुगलक ने चाँदी एवं तांबे के मिश्रण से शशगनी, अद्धा एवं बिख जैसे सिक्के चलाये
  • फिरोज शाह तुगलक ने अपनी आत्मकथा फतूहात-ए-फिरोजशाही के नाम से लिखी 
  • फिरोज शाह तुगलक के दरबार में शम्स-ए-शिराज अफीक एवं जियाउद्दीन बरनी जैसे विद्वानों को संरक्षण प्राप्त था 
  • फिरोज शाह तुगलक ने ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से लूटे गये 1300 ग्रंथों में से कुछ का फारसी अनुवाद दलायले फिरोजशाही के नाम से फारसी विद्वान आजुद्दीन खादिलखानी द्वारा करवाया 
  • खान-ए-जहाँ तेलंगानी के मकबरे की तुलना जेरुसलम स्थित उमर मस्जिद से की जाती है, उक्त मकबरे का निर्माण फिरोज शाह तुगलक के काल में ही हुआ 
  • दिल्ली स्थित फिरोजशाह कोटला दुर्ग फिरोज शाह तुगलक द्वारा निर्मित करवाया गया 

नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक(1399–1412 ई०)

  • नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक, तुगलक वंश का अंतिम शासक था इसी के शासनकाल में तैमूर लंग ने 1398-99 ई० में भारत पर आक्रमण किया 
  • मलिक शर्शक ने नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में ही जौनपुर को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया
शासक शासन-काल
गयासुद्दीन तुग़लक़ (गाजी मलिक) 1320–1325
मुहम्मद बिन तुगलक (जौना खाँ) 1325–1351
महमूद इब्न मुहम्मद 1351 (March)
फिरोज शाह तुगलक 1351–1388
गयास-उद-दीन तुगलक II 1388–1389
अबू बक्र शाह 1389–1390
नासिर-उद-दीन मुहम्मद शाह III 1390–1393
अला-उद-दीन सिकंदर शाह प्रथम 1393
महमूद नासिर उद-दीन 1393–1394
नासिर -उद-दीन नुसरत शाह तुगलक 1394–1399
नासिरुद्दीन महमूद शाह तुगलक 1399–1412

 

सैय्यद वंश (1414 ई० -1451 ई०)

खिज्र खाँ(1414-21 ई०)

  • तुगलक वंश के पश्चात दिल्ली पर सैय्यद वंश के शासन की स्थापना तैमूरलंग के सेनापति खिज्र खाँ ने की
  • सैय्यद वंश का शासन 37 वर्षों तक रहा जिसमें मुबारक शाह, मुहम्मद शाह एवं अलाउद्दीन शाह आलम जैसे शासकों ने राज किया 
  • खिज्र खाँ ने रैयत-ए-आला की उपाधि से ही स्वयं को संतुष्ट रखा 
  • याह्या-बिन-अहमद सरहिन्दी जिन्होंने तारीख-ए-मुबारकशाही की रचना की, मुबारक शाह के दरबार में संरक्षण पाते थे 

अलाउद्दीन शाह आलम(1443-51 ई०)

  • सैय्यद वंश का अंतिम शासक सुल्तान अलाउद्दीन शाह आलम था 

 

शासक शासन-काल
खिज्र खान 1414–1421
मुबारक शाह 1421–1434
मुहम्मद शाह 1434–1443
अलाउद्दीन शाह आलम 1443-1451

लोदी वंश(1451 ई० -1526 ई०)

बहलोल लोदी(1451-89 ई०)

  • दिल्ली सल्तनत पर प्रथम अफगान वंश की स्थापना का श्रेय बहलोल लोदी को जाता है उसने लोदी वंश की स्थापना की 
  • बहलोल लोदी ने शाह गाजी की उपाधि धारण की तथा बहलोल सिक्कों का प्रचलन करवाया 

सिकंदर लोदी(1489-1517 ई०)

  • लोदी वंश के शासक सुल्तान सिकंदर लोदी ने आगरा शहर का निर्माण कराया तथा यहाँ अपनी राजधानी स्थापित की 
  • सिकंदर लोदी ने भूमि के माप के लिए गज-ए-सिकंदरी का प्रचलन किया
  • सिकंदर लोदी ने गुलरुखी नाम से फारसी भाषा में कविताओं की रचना की, उसके आदेश पर आयुर्वेदिक ग्रंथ का फारसी में फरहंगे सिकंदरी नाम से अनुवाद हुआ 
  • सिकंदर लोदी ने मुसलमान महिलाओं के पीरों एवं संतों की मजार पर जाने तथा मुसलमानों द्वारा ताजिया निकालने को प्रतिबंधित कर दिया
  • सिकंदर लोदी के शासनकाल में गान विद्या के एक प्रसिद्ध ग्रंथ लज्जत-ए-सिकंदरशाही की रचना हुई
  • सिकंदर लोदी के वजीर ने 1500 ई० में मोठ मस्जिद का निर्माण कराया 
  • सिकंदर लोदी के पश्चात इब्राहिम लोदी शासक बना जो कि दिल्ली सल्तनत का आखिरी शासक था

इब्राहिम लोदी(1517-1526 ई०)

  • इब्राहिम लोदी के दरबार में मजखाने अफगाना के रचनाकार अहमद यादगार को संरक्षण प्राप्त था 
  • इब्राहिम लोदी ने भवन निर्माण में दोहरे गुम्बदों एवं खपरैलों के इस्तेमाल की शुरुआत की
  • फरगना के जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने 21 अप्रैल 1526 ई० को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली पर से लोधी वंश के शासन का अंत कर दिया
शासक शासन-काल
बहलोल लोदी 1451–1489
सिकंदर लोदी 1489–1517
इब्राहिम लोदी 1517–1526

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